उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया Harish Rana Case इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी एक महिला हरीश राणा को अंतिम विदाई देते हुए नजर आती हैं। वीडियो में वह उनके माथे पर तिलक लगाकर कहती हैं— “सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ।”
यह वीडियो उस समय का बताया जा रहा है जब हरीश राणा को अस्पताल ले जाने से पहले परिवार और करीबी लोगों ने उन्हें भावुक विदाई दी थी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद कई लोग रो पड़े और सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो लोगों को भावुक कर रहा है।
कौन हैं Harish Rana
हरीश राणा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले थे। वर्ष 2013 में एक दुर्घटना में उन्हें गंभीर मस्तिष्क चोट लगी, जिसके बाद वे लंबे समय तक कोमा जैसी स्थिति में रहे। उस घटना के बाद से ही उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और उन्हें लगातार लाइफ-सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।
करीब 13 वर्षों तक वे वेजिटेटिव स्टेट (अचेत अवस्था) में रहे और परिवार लगातार उनकी देखभाल करता रहा। डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी Passive Euthanasia की अनुमति
हरीश राणा के परिवार ने उनकी हालत को देखते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने passive euthanasia (इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी।
इस फैसले का मतलब था कि डॉक्टर उनकी लाइफ-सपोर्ट प्रणाली को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। अदालत के इस फैसले को भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
हरीश के पिता ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के लिए ऐसा नहीं चाहते, लेकिन उनके बेटे की हालत को देखते हुए यह फैसला बेहद कठिन लेकिन जरूरी था।
वायरल हुआ भावुक वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ब्रह्माकुमारी संस्था की लवली दीदी हरीश राणा को आध्यात्मिक विदाई देती नजर आती हैं। वह उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाकर उन्हें शांति से विदा होने की बात कहती हैं।
वीडियो में वह कहती हैं:
“सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ।”
इस दौरान परिवार के सदस्य भी भावुक नजर आते हैं और वहां का माहौल बेहद मार्मिक हो जाता है।
AIIMS ले जाया गया हरीश राणा को
रिपोर्ट्स के मुताबिक हरीश राणा को उनके घर से दिल्ली के AIIMS अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी लाइफ-सपोर्ट प्रणाली हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस दौरान परिवार के लोग और करीबी रिश्तेदार उनके साथ मौजूद थे। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक का माहौल था और कई लोग उनके घर के बाहर इकट्ठा हुए।
परिवार की 13 साल की लंबी लड़ाई
हरीश राणा का मामला इसलिए भी खास बन गया क्योंकि उनके माता-पिता ने 13 वर्षों तक लगातार उनकी देखभाल की।
उनकी मां ने दिन-रात उनकी सेवा की और परिवार लगातार उम्मीद करता रहा कि शायद किसी दिन चमत्कार हो जाए। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति में सुधार की संभावना लगभग खत्म हो चुकी थी।
आखिरकार परिवार ने अदालत में याचिका दाखिल कर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी स्थिति को देखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
देशभर में छिड़ी बहस
हरीश राणा का मामला सामने आने के बाद देश में passive euthanasia यानी इच्छामृत्यु को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है।
कुछ लोग इसे मानवीय फैसला मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे नैतिक और धार्मिक दृष्टि से गलत बताते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीज की हालत और परिवार की स्थिति को देखते हुए अदालत और डॉक्टर मिलकर फैसला लेते हैं।
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