नई दिल्ली
Parliament of India में चल रहे बजट सत्र के दौरान Parliament Budget Session 2026 में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने सरकार से इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है और इसका प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। Rahul Gandhi ने कहा कि पश्चिम एशिया में जो हो रहा है उससे भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है और सरकार को इस पर संसद में चर्चा करनी चाहिए।
विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि Parliament Budget Session 2026 में सरकार को मिडिल ईस्ट संकट, तेल की बढ़ती कीमतों और वहां फंसे भारतीयों के मुद्दे पर स्पष्ट बयान देना चाहिए।
कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संकट पर खुली बहस से बच रही है। संसद की कार्यवाही के दौरान नारेबाजी के कारण कई बार कार्यवाही बाधित भी हुई।
जयशंकर ने संसद में क्या कहा
S. Jaishankar ने संसद में कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि सरकार का मुख्य फोकस क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का मानना है कि इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए और तनाव कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
तेल की कीमतों को लेकर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संघर्ष बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर Parliament Budget Session 2026 के दौरान मिडिल ईस्ट संकट, तेल की कीमतों और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है।
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