नई दिल्ली
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भाजपा नेता Kirti Azad ने हाल ही में वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी को धार्मिक स्थलों में ले जाना राजनीति और धर्म के बीच अस्वाभाविक मिश्रण है।
Kirti Azad के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई। कई क्रिकेटर्स और नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी।
क्रिकेटर्स की प्रतिक्रिया
कुछ क्रिकेटर्स ने कहा कि ट्रॉफी खिलाड़ियों की मेहनत का सम्मान है और इसे धार्मिक या राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं। वहीं कुछ ने इसे राष्ट्रीय उत्सव के हिस्से के रूप में देखा और इसे धर्म से जोड़ने में कोई आपत्ति नहीं जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि Kirti Azad World Cup Trophy बयान ने खेल और राजनीति के बीच एक नई बहस खड़ी कर दी है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
राजनीतिक पार्टियों ने अलग-अलग बयान दिए। भाजपा के कुछ नेताओं ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने के समर्थन में ट्वीट किया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे आलोचना का विषय बनाया।
कुल मिलाकर यह मुद्दा केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
सोशल मीडिया और जनता की राय
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस चल रही है। कई लोग मानते हैं कि खेल और धर्म अलग-अलग क्षेत्रों के हैं, जबकि कुछ ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप में देखा।
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